1. लेखक यह क्यों सोचता है कि उस आदमी की अलग-अलग पोशाकें नहीं होंगी
2. 'प्रेमचंद के फटे जूते गय की किस विधा की रचना
3. 'कोई चीज जो परम-पर-परम सदियों से जम गई है, उससे शायद तुमने ठोकर मार-मारकर अपना जूता फाड़ लिया।' इस पंक्ति का भाव स्पष्ट कीजिए।
4. 'टीलों से समझौता भी हो जाता है। यहाँ टीलों का क्या अर्थ है?
5. सख्त चीज से ठोकर मारने का क्या आशय है?
6. यहाँ नदी की क्या विशेषता बताई गई है?
7. इस गद्यांश को जिस पाठ से लिया गया है, उसके लेखक का नाम बताइए।